प्रेम पर संस्कृत श्लोक अर्थ सहित

इस अंक में प्रेम पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित प्रस्तुत हैं। प्रेम युगों से सत्य था। कभी राधा-कृष्ण के रूप में तो कभी शिव पार्वती के रूप। बड़ी विचित्र गति होती है प्रेम की। जीवन के किसी न किसी कालखंड में हमें प्रेम की अनुभूति हो ही जाती है। जिस दिन आपको प्रेम की अनुभूति हो जाएगी। उस दिन आप संसार के झूठे प्रेम से मुक्त हो जाओगे। यह एक ऐसी संवेदना है, जो किसी को भी आपके तरफ खींच कर ला सकती है। चाहे वो मनुष्य हो या पशु पक्षी।

प्रेम पर संस्कृत श्लोक
Quotes on love in sanskrit

यदि प्रेम को बांधा जा सकता तो हम भी बांध लेते अपने प्रियतम को एक मजबूत सी जंजीर से। प्रेम स्वतंत्र होता है। यह कभी बंधन में नहीं हो सकता।

प्रेम पर संस्कृत श्लोक


“प्रेमायदेवमिदमेव न वेदमेतद्,।
यो वेद वेदविदसावपि नैव वेद ।।”

– प्रेम श्लोक


अर्थ- वो प्रेम को जानकर भी अनजान ही रहते हैं, जिनको लगता है। यही और इतना ही प्रेम है। वे ऐसी ही बातें करते हैं।


“दोषमपि गुणवति जने दृष्ट्वा गुणरागिणो न खिद्यन्ते।
प्रीत्यैव शशिनि पतितं पश्यति लोकः कलङ्कमपि।।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक

अर्थात् – चंद्रमा के धब्बे को भी लोग प्रेम से देखा करते हैं। गुणवान के गुण देखकर गुणानुरागी खिन्न नहीं होते।

“कः किल न रोदित्यभीष्टविरहेण
घट्यमान-हृदयशल्यः प्रेम-परिलङ्घितो जन्तुः ।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- प्रेमी वियोग के कारण हृदय को घाव किये हुए, कौन व्यक्ति प्रेम में नहीं रोता है अर्थात् हर व्यक्ति प्रेम में रोता है।

“यत्र प्रेम नास्ति तत्र ईश्वरः नास्ति यतोहि एकः एव प्रेम अस्ति यः अमरः, विश्रामः सर्वे मर्त्यः, अयं संसारः अपि मर्त्यः।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थात- जहाँ प्रेम नहीं होता वहाँ ईश्वर नहीं होता। क्योंकि एक प्रेम ही तो है जो अमर है  बाकी तो सब नश्वर है यहाँ तक की ये संसार भी नश्वर है।


“सा सा सा सा जगति सकले कोऽयमद्वैतवादः।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- यह कैसा अद्वैतवाद है? मुझे हर जगह मेरी प्रेमिका ही नजर आ रही है।


“विनानुरागं हि प्रणयिनः प्रमदाया जीवनं व्यर्थमेव खलु !”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थात- प्रेम के बिना किसी भी प्रेमी या प्रेमिका का जीवन व्यर्थ ही है।


“अन्यमुखे दुर्वादः स्वप्रियवदने तदेव परिहासः।
इतरेन्धजन्मा यो धूमः सोगुरूभवो धूपः।।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थात- जो बात दूसरे के मुख से निंदा समझी जाती है। वही बात प्रेमिका के कहे जाने पर हंसी मान ली जाती है।साधारण लकड़ी का धूंआ-धूंआ माना जाता है और अगर की लकड़ी से निकले तो धूप समझा जाता है।


“उन्मत्त प्रेम संरम्भादारभंते यदअंगना ।
तत्र प्रत्यूहमाधातुं ब्रम्हापि खलु कातर:।।”

– प्रेम पर संस्कृत श्लोक
अर्थ - अत्यधिक प्रेम में पागल युवतियाँ जिस कार्य को प्रारम्भ क़र देते हैं। भय के कारण ब्रम्हा जी भी उसमें विघ्न नहीं डालते हैं।

प्रेम पर संस्कृत श्लोक One Line


“प्रेमाहो क्वाचिदपि नेक्षते व्ययापम् ।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम कठिनाई की परवाह नहीं करता।

“प्रेमैव हृदयानि बध्नाति।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात- प्रेम ही हृदयों को जोड़ता है।


“दयितं जनः खलु गुणीति मन्यते।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम के कारण लोग प्रेमी को गुणवान समझते हैं।


“प्रेम्णा तुल्यं बन्धनं नास्ति जन्तो:।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात- धरा के संतुलन के लिए वृक्ष, नदी, पहाड़ के साथ समस्त प्राणियों का होना आवश्यक है। जीव नहीं होंगे, तो धरती का संतुलन बिगड़ेगा और जीवन कठिन हो जायेगा।


“रसो नाम परं प्रेम।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात- प्रेम एक एहसास है।


“बलवती खलु वल्लभजनसंगमाशा ।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- अपने प्रियतम से मिलने की इच्छा  बहुत तीव्र और मजबूत होती है।


“दुर्निवारा हि नैसर्गिकी प्रीति:।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- कभी कभी देखते होंगे व्यक्ति भक्ति में नाचने लगता है, वास्तव में वह प्रेम की चाल को व्यक्त करता है।


“प्रेम पश्यति भयान्यपदेऽपि।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम को भयरहित स्थान पर भी भय लगता है।


“अहो प्रेम्णो विचित्रा गतिः।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात- प्रेम की गति विचित्र है।


“आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः. पंडितः।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात-दया, प्रेम और करुणा मानवीय गुण हैं।


“प्रेम ईश्वरस्य महत्त्मपारितोषीकमस्ति।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम ईश्वर का सबसे अच्छा उपहार है।


“प्रेम्णा तुल्यं बन्धनं नास्ति जन्तो: I”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम के समान कोई बंधन नहीं होता।


“प्रेम सत्यमस्ति !”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- प्रेम सत्य है।

“स्नेहस्य प्रकृतिरहो विवेकशून्या।”

– श्लोक संग्रह
अर्थात- प्रेम स्नेह की प्रकृति विवेक शून्य होती है।


“स्त्रीणां हि सौभाग्यमदप्रसूति: प्रियप्रसादो मदिरासहस्त्रम् ||”

– श्लोक संग्रह
अर्थ- सौभाग्य रूपी मदिरा को उत्पन्न करने वाली स्त्री का प्रेम दस हजार मदिराओं के नशे के बराबर होता है।

प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक

प्रेम पर संस्कृत श्लोक प्रेमिका
प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक


“न हि वान्छति यः प्रियः कदा निजसर्वस्वसमर्पितअप्यहो। प्रतिदानफलं प्रियां प्रति जगति प्रेम तदेव कथ्यते।।”

– श्लोक संग्रह
अर्थ - अपना सर्वस्व अर्पित कर, जो बदले में कुछ कामना नहीं करता है। उसे प्रेम कहते हैं। निस्वार्थ प्रेम करने पर भी जो प्रेमी अपने प्रेमिका से कुछ पाने की कामना न करे, उसे ही प्रेम कहते हैं।


“भवतां हृदि प्रेमास्तु भवतां स्वास्थ्मुत्तमम्।
सद्भाव-शुद्धहृदया:भवन्तु लोका दयान्विता:।।”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थात- आप सभी के हृदय में परस्पर प्रेम-भाव रहें। आप सभी का स्वास्थ्य उत्तम हों। आप सभी लोग सद्भाव से परिपूर्ण शुद्ध हृदय से युक्त हों। ऐसी मेरी शुभकामना है।


“प्रेमास्तु तद् यन्न हि किञ्चिदेव, कस्माच्चन प्रार्थयतेऽविकार।”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- जो विकार हीन रहकर कुछ नहीं मांगता, उसे प्रेम कहते हैं।


“भावो जन्मान्तरीणो हि स्थिरः सम्बन्ध उच्यते।”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- जन्मांतर तक साथ रहने वाला भाव ही स्थिर प्रेम कहलाता है।


“विच्छिन्नसंहितस्य प्रेम्णः प्रत्यक्षितव्यलीकस्य । भवति बत विरसो रसो तापितशीतस्य पयस इव ।।”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थात- जैसे उबालकर शीतल जल का स्वाद नष्ट हो जाता है। ठीक उसी तरह परस्पर विश्वास खोने के कारण प्रेम टूटकर, किसी तरह पुनः जुड़ जाय, तो उसका रस समाप्त हो जाता है ।


“ददाति प्रतिगृह्णाति गुह्यमाख्याति पृच्छति।
भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम्।।”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- लेना, देना, खाना, खिलाना, रहस्य बताना और उन्हें सुनना ये सभी 6 प्रेम के लक्षण हैं।


“बन्धनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबनधनमन्यत्। दारुभेद निपुणोऽपि षडङ्घ्रि निष्क्रियो भवति पङ्कजकोशे॥”

– प्रेमिका पर संस्कृत श्लोक
अर्थ- बन्धन तो अनेकों हैं पर प्रेम के बंधन जैसा नहीं। प्रेम बन्धन के कारण ही काठ में छिद्र करने वाला भ्रमर कमल कोष में निष्क्रिय हो जाता है।


“विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं ग्रहेषु च।
व्याधि तस्यो औषधे मित्रं धर्मो मित्रं मृत्यस च।।”

– विधा श्लोक संग्रह


“दर्शने स्पर्शणे वापि श्रवणे भाषणेऽपि वा।
यत्र द्रवत्यन्तरङ्गं स स्नेह इति कथ्यते॥”

– प्रेम श्लोक
अर्थात- यदि किसी को देखने से या स्पर्श करने से, सुनने से या बात करने से हृदय द्रवित हो तो इसे स्नेह कहा जाता है ।


“भवति हृदयहारी क्वापि कस्यापि कश्चिन्न खलु गुणविशेषः प्रेमबन्धप्रयोगे ।”

– प्रेमिका पर श्लोक
अर्थ- प्रेमबंधन के प्रसंग में कहीं भी कोई भी किसी का दिल चुरा सकता है। इसमें कोई गुण विशेष कारण नहीं होता है।


“प्रथमेऽपेक्ष्यते कालः प्रणयपत्रलेखने।
कालो नवविहङ्गानामुड्डयनेऽप्यपेक्ष्यते।।
‘वात्स्यकोशः'”

– प्रेम श्लोक
अर्थात- प्यार का पहला पत्र लिखने में वक्त तो लगता है।
नये परिंदे को उड़ने में वक्त तो लगता है।


“शब्दादृते व्यर्थः शब्दश्चार्थादृते यथा। प्रिये! शब्दोऽहमर्थस्त्वं व्यर्थोऽहं त्वदृते तथा।।”

– प्रेम श्लोक
अर्थ- जैसे शब्द के बिना अर्थ तथा अर्थ के बिना शब्द व्यर्थ । उसी प्रकार मैं शब्द तुम अर्थ, तुम बिन मैं व्यर्थ।


“कर्गदं लेखनी नासीद् दूरभाषोऽपि नो यदा।
तदाप्यासीत्परं प्रेम मौनं तथाहि पावनम्।।”

– प्रेम श्लोक
भावार्थ - ना कागज था, ना कलम थी, ना फोन था,
प्रेम तब भी था, लेकिन पवित्र और मौन।


“प्रेमैकानुभूतिः हृदानुभाव्या न तु दर्शिनी।।”

– प्रेम श्लोक
अर्थ - प्रेम एक एहसास है, जिसे आँखों से नहीं देखा जाता बल्कि दिल से महसूस किया जाता है।


“जीवितफलं हि प्रियतममुखावलोकनम् ।”

– प्रेम श्लोक
अर्थ- जीने का सही मतलब तो तभी है जब अपनी प्रेमिका या प्रेमी के मुखमंडल को (ह्रदय की गहराइयों से प्रेम में डूबते हुए) निहारा हो।

“प्रेमैका पावनी गाथानुभूतेर्भुवि वर्तते।
प्रेमोन्मादी परं स्वार्थी संसारे नाभिनन्द्यते।।”

– प्रेम श्लोक
भावार्थ:- प्रेम एक पवित्र गाथा की अनुभूति है। स्वार्थवश प्रेम करनेवाले का संसार आदर नहीं करता।


“विनानुरागं हि प्रणयिनः प्रमदाया जीवनं व्यर्थमेव खलु ।”

– प्रेम श्लोक


अर्थ- प्रेम के बिना किसी भी प्रेमी या प्रेमिका का जीवन व्यर्थ ही है।

संस्कृत में प्रेम का इजहार कैसे करते हैं?

“त्वयि मे अनुराग:।” या “अहं त्वयि स्निह्यामि।”

– संस्कृत में प्रेम
अर्थात- मैं तुमसे प्रेम (प्यार) करता हूँ।

Final words –

प्रेम शब्द सुनकर ही एक आनन्ददायक अनुभूति होती है। सब को अपने-अपने हिस्से का प्रेम मिले ऐसी मेरी कामना है। स्वतंत्र प्रेम, बंधनं रहित प्रेम। प्रेम में बंधन होते तो हम भी अपने प्रियतम को जिसे मजबूत से अटूट बंधन से बांध लिए होते।

प्रिय पाठक..! आप हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। वैसे तो प्रेमरूपी सागर अनंत है। यह लेख एक छोटा सा प्रयास था। आप के सुझाव भी हमारे लिए अति महत्वपूर्ण हैं। आप अपने सुझाव ‘कमेंट’ के माध्यम से अवश्य प्रस्तुत करें। ऐसा मेरा निवेदन है।

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