पूरा भारत इस समय लैंडर के चाँद पर सुरक्षित लैंड करने के लिए प्रार्थना कर रहा है।

भारत ने मिशन चन्द्रयान-2 के तहत 2019 में लैंडर को चंद्रमा पर उतारने का प्रयास किया था। हालांकि आखिरी क्षणों में लैंडर से संपर्क टूट गया था।

भारत ने पुनः 14 जुलाई को मिशन चन्द्रयान-3 को श्रीहरिकोटा से लांच किया।

लैंडर प्रोपल्शन मॉड्यूल से 17 अगस्त को सफलता पूर्वक अलग हो चुका है।

लैंडर को 'डीबूस्ट' यानि धीमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लैंडर स्वयं को सीधा करेगा और चाँद की सतह पर उतरने के लिए स्वयं को तैयार करेगा।

लैंडर कुछ समय तक जांच करेगा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने जो लैंड करने का स्थान तय किया है। वहाँ लैंड करने में कोई समस्या तो नहीं है।

विक्रम से अलग होकर जो प्रोपल्शन पीछे छूट चुका है। वह भी काम करेगा।

जो सूचनाएं विक्रम के माध्यम से इसरो को मिलेगी। उसमें प्रोपल्शन बैकअप की तरह कार्य करेगा।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर वुधवार 23 अगस्त को शाम 5:47 पर लैंडर की 'सॉफ्ट लैंडिंग' निर्धारित की गई है।